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mahabharat 8.60.55-56: भरतभूषण! आप बड़े वेग से शत्रु सेना पर आक्रमण करें। कर्ण क्रोध में भरकर पांचालों पर आक्रमण कर रहा है। मैं धृष्टद्युम्न के रथ के पास उसकी ध्वजा देख रहा हूँ। 55-56।   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  8.60.55-56 
उत्तमं जवमास्थाय प्रत्येहि भरतर्षभ॥ ५५॥
असौ कर्ण: सुसंरब्ध: पञ्चालानभिधावति।
केतुमस्य हि पश्यामि धृष्टद्युम्नरथं प्रति॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
भरतभूषण! आप बड़े वेग से शत्रु सेना पर आक्रमण करें। कर्ण क्रोध में भरकर पांचालों पर आक्रमण कर रहा है। मैं धृष्टद्युम्न के रथ के पास उसकी ध्वजा देख रहा हूँ। 55-56।
 
Bharatbhushan! You attack the enemy army with great speed. Karna filled with anger is attacking the Panchalas. I can see his flag near Dhrishtadyumna's chariot. 55-56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)