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mahabharat 8.60.41-42: भरत! हे प्रजानाथ! युद्धस्थल में वही कर्ण आपके सामने व्यंग्यात्मक दृष्टि से देख रहा है, जिसके सिर पर सौ उज्ज्वल बाणों से सुशोभित तथा पूर्ण चन्द्रमा के समान चमकने वाला श्वेत छत्र है। निश्चय ही वह महान वेग का आश्रय लेकर युद्धस्थल में आपके सामने आएगा। ॥41-42॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  8.60.41-42 
पूर्णचन्द्रनिकाशेन मूर्ध्निच्छत्रेण भारत।
ध्रियमाणेन समरे श्रीमच्छतशलाकिना॥ ४१॥
एष त्वां प्रेक्षते कर्ण: सकटाक्षं विशाम्पते।
उत्तमं जवमास्थाय ध्रुवमेष्यति संयुगे॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भरत! हे प्रजानाथ! युद्धस्थल में वही कर्ण आपके सामने व्यंग्यात्मक दृष्टि से देख रहा है, जिसके सिर पर सौ उज्ज्वल बाणों से सुशोभित तथा पूर्ण चन्द्रमा के समान चमकने वाला श्वेत छत्र है। निश्चय ही वह महान वेग का आश्रय लेकर युद्धस्थल में आपके सामने आएगा। ॥41-42॥
 
Bharat! O Prajanath! In the battlefield, the same Karna is looking at you with a sarcastic look on his head, on whose head is a white umbrella adorned with a hundred shining shafts and shining like the full moon. Certainly, he will come in front of you in the battlefield, taking recourse to great speed. ॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)