vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना
»
श्लोक 37
श्लोक
8.60.37
एष सर्वात्मना पाण्डूंस्त्रासयित्वा महारणे।
अभिभाषति राधेय: सर्वसैन्यानि मानद॥ ३७॥
अनुवाद
हे पूज्यवर! यह राधापुत्र कर्ण महायुद्ध में पाण्डव सैनिकों को पूर्णतः भयभीत करके अपनी सम्पूर्ण सेना से ऐसा कह रहा है॥37॥
Respected! This Radha's son Karna is saying this to his entire army, having completely frightened the Pandava soldiers in the great war. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×