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mahabharat 8.60.25-26: पार्थ! राजा का ध्वज दिखाई नहीं दे रहा है। कर्ण ने उसे अपने बाणों से काट डाला है। हे भरतपुत्र! हे प्रभु! उसने नकुल-सहदेव, सात्यकि, शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, शतानीक, समस्त पांचाल सैनिकों और चेदि देश के योद्धाओं के सामने ऐसा किया है।॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  8.60.25-26 
न केतुर्दृश्यते राज्ञ: कर्णेन निहत: शरै:।
पश्यतोर्यमयो: पार्थ सात्यकेश्च शिखण्डिन:॥ २५॥
धृष्टद्युम्नस्य भीमस्य शतानीकस्य वा विभो।
पञ्चालानां च सर्वेषां चेदीनां चैव भारत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! राजा का ध्वज दिखाई नहीं दे रहा है। कर्ण ने उसे अपने बाणों से काट डाला है। हे भरतपुत्र! हे प्रभु! उसने नकुल-सहदेव, सात्यकि, शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, शतानीक, समस्त पांचाल सैनिकों और चेदि देश के योद्धाओं के सामने ऐसा किया है।॥ 25-26॥
 
‘Partha! The king's flag is not visible. Karna has cut it with his arrows. O son of Bharata! O Lord! He has done this in front of Nakul-Sahadeva, Satyaki, Shikhandi, Dhrishtadyumna, Bhimasena, Satanika, all the Panchala soldiers and the warriors of Chedi country.॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)