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mahabharat 8.60.13: ‘वीर दुर्योधन, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कर्ण के बाणों का वेग पर्वतों को भी भेदने वाला है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.60.13 
दुर्योधनस्य वीरस्य द्रौणे: शारद्वतस्य च।
कर्णस्य चेषुवेगो वै पर्वतानपि शातयेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘वीर दुर्योधन, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कर्ण के बाणों का वेग पर्वतों को भी भेदने वाला है।॥13॥
 
‘The speed of the arrows of the brave Duryodhana, Ashwatthama, Krupacharya and Karna can pierce even the mountains.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)