श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.60.11 
यथाविधमनीकं तु धार्तराष्ट्रस्य पाण्डव।
नास्य शक्रोऽपि मुच्येत सम्प्राप्तो बाणगोचरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! दुर्योधन की सेना जिस प्रकार बनी है, उससे तो ऐसा लगता है कि उसके बाणों के मार्ग में आने पर इन्द्र भी नहीं बच सकते।
 
Son of Pandu! The way Duryodhan's army is formed, it seems that even Indra cannot survive if he comes in the path of his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)