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mahabharat 8.60.10: मैं तो यही मानता हूँ कि इस समय कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर दुर्योधन के वश में होकर मृत्यु के मुख में चले गए हैं, अथवा प्रज्वलित अग्नि में आहुति दे दी है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.60.10 
मृत्योर्मुखगतं मन्ये कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
हुतमग्नौ च कौन्तेयं दुर्योधनवशं गतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं तो यही मानता हूँ कि इस समय कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर दुर्योधन के वश में होकर मृत्यु के मुख में चले गए हैं, अथवा प्रज्वलित अग्नि में आहुति दे दी है॥10॥
 
I believe that at this moment Yudhishthira, son of Kunti, has gone into the jaws of death under the control of Duryodhana, or has become a sacrifice in the blazing fire.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)