मृत्योर्मुखगतं मन्ये कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
हुतमग्नौ च कौन्तेयं दुर्योधनवशं गतम्॥ १०॥
अनुवाद
मैं तो यही मानता हूँ कि इस समय कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर दुर्योधन के वश में होकर मृत्यु के मुख में चले गए हैं, अथवा प्रज्वलित अग्नि में आहुति दे दी है॥10॥
I believe that at this moment Yudhishthira, son of Kunti, has gone into the jaws of death under the control of Duryodhana, or has become a sacrifice in the blazing fire.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥