श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.58.25-26h 
रथांश्च बहुधा भग्नान् हेमकिङ्किणिन: शुभान्॥ २५॥
वाजिनश्च हतान् पश्य निष्कीर्णान्त्राञ्शराहतान्।
 
 
अनुवाद
देखो, छोटे-छोटे सोने के घंटियों वाले बहुत-से सुन्दर रथ टूटे-फूटे पड़े हैं। बाणों से घायल घोड़े मरे पड़े हैं और उनकी आँतें बाहर निकल आई हैं।॥25 1/2॥
 
‘Look, many beautiful chariots with small gold bells are lying broken into pieces. The horses wounded by arrows are lying dead and their intestines have come out.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)