श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  8.56.65-66 
शिखण्डी सहदेवश्च नकुलो नाकुलिस्तथा।
जनमेजय: शिनेर्नप्ता बहवश्च प्रभद्रका:॥ ६५॥
एते पुरोगमा भूत्वा धृष्टद्युम्नस्य संयुगे।
कर्णमस्यन्तमिष्वस्त्रैर्विचेरुरमितौजस:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
शिखण्डी, सहदेव, नकुल, शतानीक, जनमेजय, सात्यकि तथा अन्य बहुत से वीर पुरुष, ये सभी महारथी योद्धा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से बाणों की वर्षा करने वाले कर्ण पर आक्रमण करते हुए धृष्टद्युम्न के सामने रणभूमि में विचरण करने लगे ॥65-66॥
 
Shikhandi, Sahadeva, Nakul, Shatanika, Janamejaya, Satyaki and many other brave men, all these mighty warriors started roaming in the battlefield in front of Dhrishtadyumna, attacking Karna, who was showering arrows, with various types of weapons. 65-66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)