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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना
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श्लोक 31-32h
श्लोक
8.56.31-32h
तदपास्य धनुश्छिन्नं धृष्टद्युम्नो महामना:॥ ३१॥
अन्यदादत्त वेगेन धनुर्भल्लांश्च षोडश।
अनुवाद
महाबुद्धिमान धृष्टद्युम्न ने टूटे हुए धनुष को फेंककर बड़ी तेजी से दूसरा धनुष और सोलह बाण हाथ में ले लिये।
Throwing away the broken bow, the great-minded Dhrishtadyumna took up another bow and sixteen arrows in his hands with great speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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