कच्चित् कुशलिनौ बाहू मुष्टिर्वा न व्यशीर्यत।
उदीर्यमाणं हि रणे पश्यामि द्रौणिमाहवे॥ १३७॥
अनुवाद
क्या तुम्हारी दोनों भुजाएँ ठीक हैं ? क्या तुम्हारी मुट्ठियाँ ढीली हो गई हैं ? हे अर्जुन ! मैं देख रहा हूँ कि अश्वत्थामा युद्धभूमि में तुम पर विजय प्राप्त कर रहा है ॥137॥
‘Are both your arms intact? Has your fist become loose? Arjuna! I see that Ashvatthama is getting the better of you on the battlefield.॥ 137॥