श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  8.56.112 
स पपात ततो वाहात् सुलोहितपरिस्रव:।
मन:शिलागिरे: शृङ्गं वज्रेणेवावदारितम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
फिर वह अपने वाहन से गिर पड़ा, और उसके शरीर से रक्त झरने के समान बह निकला, मानो मानसिल पर्वत का शिखर वज्र से छेदित होकर भूमि पर गिर पड़ा हो ॥112॥
 
Then he fell from his vehicle, blood gushing out like a fountain, as if the peak of the Mansil mountain had been pierced by a thunderbolt and fallen to the ground. ॥ 112॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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