श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  8.56.109 
अङ्गाङ्गावयवैश्छिन्नैर्व्यायुधास्तेऽपतन् भुवि।
विष्वग्वाताभिसम्भग्ना बहुशाखा इव द्रुमा:॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
जैसे चारों ओर से उठने वाले तूफान से अनेक शाखाओं वाले वृक्ष उखड़कर गिर पड़ते हैं, वैसे ही वे शस्त्रहीन शत्रु भी अपने-अपने शरीर के अंग कटकर भूमि पर गिर पड़े॥109॥
 
Just as trees with many branches uprooted by a storm rising from all sides fall down, similarly those weaponless enemies, having had each and every part of their bodies cut off, fell down on the ground.॥ 109॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas