Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.53.36-38h: उन बाणों से अत्यन्त घायल होकर अर्जुन अत्यन्त पीड़ा से पीड़ित होकर रथ के पिछले भाग में बैठ गये। तब सब लोग बड़े जोर से चिल्लाने लगे, ‘अर्जुन मर गया!’ उस समय शंख बजने लगे, तुरहियों की गम्भीर ध्वनि फैलने लगी और नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि के साथ-साथ योद्धाओं की गर्जना भी आने लगी।   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 36-38h
 
 
श्लोक  8.53.36-38h 
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत्॥ ३६॥
तत उच्चुक्रुशु: सर्वे हत: पार्थ इति स्म ह।
तत: शङ्खनिनादाश्च भेरीशब्दाश्च पुष्कला:॥ ३७॥
नानावादित्रनिनदा: सिंहनादाश्च जज्ञिरे।
 
 
अनुवाद
उन बाणों से अत्यन्त घायल होकर अर्जुन अत्यन्त पीड़ा से पीड़ित होकर रथ के पिछले भाग में बैठ गये। तब सब लोग बड़े जोर से चिल्लाने लगे, ‘अर्जुन मर गया!’ उस समय शंख बजने लगे, तुरहियों की गम्भीर ध्वनि फैलने लगी और नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि के साथ-साथ योद्धाओं की गर्जना भी आने लगी।
 
Arjuna, deeply wounded by those arrows, sat in the rear of the chariot in great pain. Then everybody started shouting loudly, 'Arjuna is dead!' At that time, conches started blowing, the deep sound of trumpets started spreading and along with the sound of various kinds of musical instruments, the roars of the warriors also started coming. 36-37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)