Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.53.3: युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले संशप्तकगण अत्यन्त कुपित होकर अर्जुन के सिर पर सब ओर से बाणों की वर्षा करने लगे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 8.53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनद्वारा दस हजार संशप्तक योद्धाओं और उनकी सेनाका संहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.53.3 
संशप्तकास्तु समरे शरवृष्टी: समन्तत:।
अपातयन् पार्थमूर्ध्नि जयगृद्धा: प्रमन्यव:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले संशप्तकगण अत्यन्त कुपित होकर अर्जुन के सिर पर सब ओर से बाणों की वर्षा करने लगे॥3॥
 
The Samsaptaks, desirous of victory in the battle, became extremely enraged and started raining arrows on Arjuna's head from all sides. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)