श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.50.7 
दृष्ट्वा कर्णं समायान्तं भीम: क्रोधसमन्वित:।
मतिं चक्रे विनाशाय कर्णस्य भरतर्षभ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कर्ण को आते देख भीमसेन क्रोध में भरकर उसके विनाश की बात सोचने लगे॥7॥
 
Bharatshrestha! Seeing Karna coming, Bhimsen, filled with anger, thought of his destruction. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)