श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 50: कर्ण और भीमसेनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.50.18 
संजय उवाच
इति ब्रुवति राधेयं मद्राणामीश्वरे नृप।
अभ्यवर्तत वै कर्णं क्रोधदीप्तो वृकोदर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे नरदेव! मद्रराज शल्य राधापुत्र कर्ण से ये बातें कह ही रहे थे कि क्रोध से भरे हुए भीमसेन उनके सामने आ पहुँचे।
 
Sanjaya says: O lord of men! Madra king Shalya was saying these things to Radha's son Karna when Bhimasena, inflamed with anger, arrived in front of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)