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श्लोक 8.49.56  |
ब्राह्मे बले भवान् युक्त: स्वाध्याये यज्ञकर्मणि।
मा स्म युद्ध्यस्व कौन्तेय मा स्म वीरान् समासद:॥ ५६॥ |
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| अनुवाद |
| कुन्तीकुमार! तुम केवल ब्रह्मबल, स्वाध्याय और यज्ञकर्म में ही कुशल हो; इसलिए न तो युद्ध करो और न योद्धाओं के सामने जाओ॥ 56॥ |
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| Kuntikumar! You are skilled only in Brahmabal, Swadhyaya and Yajna-karma; therefore neither fight nor go in front of warriors.॥ 56॥ |
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