श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  8.49.56 
ब्राह्मे बले भवान् युक्त: स्वाध्याये यज्ञकर्मणि।
मा स्म युद्‍ध्यस्व कौन्तेय मा स्म वीरान् समासद:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! तुम केवल ब्रह्मबल, स्वाध्याय और यज्ञकर्म में ही कुशल हो; इसलिए न तो युद्ध करो और न योद्धाओं के सामने जाओ॥ 56॥
 
Kuntikumar! You are skilled only in Brahmabal, Swadhyaya and Yajna-karma; therefore neither fight nor go in front of warriors.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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