श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  8.49.12-13 
यद् बलं यच्च ते वीर्यं प्रद्वेषो यस्तु पाण्डुषु॥ १२॥
तत् सर्वं दर्शयस्वाद्य पौरुषं महदास्थित:।
युद्धश्रद्धां च तेऽद्याहं विनेष्यामि महाहवे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
परंतु आज तुम पाण्डवों के प्रति जो बल, पराक्रम और द्वेष रखते हो, उसे महान् पुरुषार्थ द्वारा प्रकट करो। आज महासमर में मैं तुम्हारे युद्ध करने के साहस को नष्ट कर दूँगा।॥12-13॥
 
‘But today show all the strength, valour and hatred you have for the Pandavas by resorting to great effort. Today in the great battle I will destroy your courage to fight.’॥ 12-13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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