vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 49: कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय और तिरस्कार तथा पाण्डवोंके हजारों योद्धाओंका वध और रक्त-नदीका वर्णन तथा पाण्डव महारथियोंद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस और उसका पलायन
»
श्लोक 10
श्लोक
8.49.10
ततो युधिष्ठिर: कर्णमदूरस्थं निवारितम्।
अब्रवीत् परवीरघ्नं क्रोधसंरक्तलोचन:॥ १०॥
अनुवाद
उस समय क्रोध से लाल आँखें किए हुए युधिष्ठिर पास ही रुके हुए शत्रुवीरों का संहार करने वाले कर्ण से बोले-॥10॥
At that time Yudhishthira, his eyes turning red with anger, spoke to Karna, the slayer of enemy warriors, who was stopped nearby -॥10॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas