श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  8.46.87 
इति संवदतोरेव तयो: पुरुषसिंहयो:।
ते सेने समसज्जेतां गङ्गायमुनवद् भृशम्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब दोनों सिंह-पुरुष शल्य और कर्ण इस प्रकार बातें कर रहे थे, उसी समय कौरवों और पाण्डवों की सेनाएँ गंगा और यमुना के समान वेग से एक-दूसरे से जा मिलीं।
 
King! While the two lion-men Shalya and Karna were talking like this, the armies of the Kauravas and the Pandavas joined each other as swiftly as the Ganges and the Yamuna.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कर्णशल्यसंवादे षट्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कर्ण और शल्यका संवादविषयक छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १६ श्लोक मिलाकर कुल १०३ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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