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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  8.46.74 
इति ब्रुवाणं मद्रेशं कर्ण: प्राहातिमन्युना।
पश्य संशप्तकै: क्रुद्धै: सर्वत: समभिद्रुत:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
यह कहते हुए कर्ण ने बड़े क्रोध से मद्रराज शल्य से कहा, 'देखिए, क्रोध में भरे हुए संशप्तकों ने सब ओर से उन पर आक्रमण कर दिया है।
 
While saying these words, Karna said to Madra king Shalya with great anger, 'Just see, the Sanshaptakas filled with rage have attacked them from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)