श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  8.46.65 
एते पर्वतशृङ्गाणां तुल्यरूपा हता द्विपा:।
संछिन्नभिन्ना: पार्थेन प्रपतन्त्यद्रयो यथा॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
ये पर्वत शिखरोंके समान विशाल हाथी अर्जुनके द्वारा मारे जानेपर टुकड़े-टुकड़े होकर पर्वतोंके समान भूमिपर गिर रहे हैं॥ 65॥
 
‘These huge elephants, like mountain peaks, having been killed by Arjuna, are being torn to pieces and falling to the ground like mountains.॥ 65॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas