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mahabharat 8.46.60: हाथों में शंख और गदा लिए हुए, ये परम पराक्रमी वसुदेवपुत्र श्रीकृष्ण, वायु के समान वेग से श्वेत घोड़ों को हांकते हुए इस ओर आ रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  8.46.60 
एष शङ्खगदापाणिर्वासुदेवोऽतिवीर्यवान्।
वाहयन्नेति तुरगान् पाण्डुरान् वातरंहस:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हाथों में शंख और गदा लिए हुए, ये परम पराक्रमी वसुदेवपुत्र श्रीकृष्ण, वायु के समान वेग से श्वेत घोड़ों को हांकते हुए इस ओर आ रहे हैं।
 
Holding conch and mace in his hands, this most mighty Sri Krishna, son of Vasudeva, is coming this way driving white horses as fast as the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)