श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.46.58 
एष ध्वजाग्रे पार्थस्य प्रेक्षणीय: समन्तत:।
दृश्यते वानरो भीमो द्विषतामघवर्धन:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन की ध्वजा के अग्रभाग पर सब ओर से दिखाई देने वाला यह भयंकर वानर दिखाई देता है, जो शत्रुओं का दुःख बढ़ाने वाला है ॥58॥
 
On the front of Arjuna's flag is seen this fearsome monkey, visible from all sides, who increases the misery of the enemies. ॥ 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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