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mahabharat 8.46.50-51h: कर्ण! जब ऐसे अपशकुन दिखाई दे रहे हैं, तो निश्चय ही आज सैकड़ों-हजारों राजा मारे जायेंगे और युद्धभूमि में लेट जायेंगे।   |   mahabharat अध्याय 8.46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  8.46.50-51h 
ध्रुवमेषु निमित्तेषु भूमिमाश्रित्य पार्थिवा:॥ ५०॥
स्वप्स्यन्ति निहता: कर्ण शतशोऽथ सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
कर्ण! जब ऐसे अपशकुन दिखाई दे रहे हैं, तो निश्चय ही आज सैकड़ों-हजारों राजा मारे जायेंगे और युद्धभूमि में लेट जायेंगे।
 
Karna! When such bad omens are appearing, then surely today hundreds and thousands of kings will be killed and will lie down on the battlefield. 50 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)