| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा » श्लोक 34-35 |
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| | | | श्लोक 8.46.34-35  | युधिष्ठिर उवाच
तस्मात् त्वमेव राधेयं भीमसेन: सुयोधनम्।
वृषसेनं च नकुल: सहदेवोऽपि सौबलम्॥ ३४॥
दु:शासनं शतानीको हार्दिक्यं शिनिपुङ्गव:।
धृष्टद्युम्नो द्रोणसुतं स्वयं योत्स्याम्यहं कृपम्॥ ३५॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर ने कहा- अर्जुन! तो फिर तुम स्वयं राधापुत्र कर्ण से युद्ध करो! भीमसेन को दुर्योधन से, नकुल को वृषसेन से, सहदेव को शकुनि से, शतानीक को दुशासन से, सात्यकि को कृतवर्मा से और धृष्टद्युम्न को अश्वत्थामा से युद्ध करने दो और मैं स्वयं कृपाचार्य से युद्ध करूंगा। | | | | Yudhishthir said- Arjun! Then you yourself fight with Radha's son Karna! Let Bhimsen fight with Duryodhana, Nakul with Vrishasena, Sahadeva with Shakuni, Satanika with Dushasana, Satyaki with Kritavarma and Dhrishtadyumna with Ashwatthama and I myself will fight with Kripacharya. | | ✨ ai-generated | | |
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