श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.46.33 
यस्त्वस्य विहितो घातस्तं करिष्यामि भारत।
प्रधानवध एवास्य विनाशस्तं करोम्यहम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
मैं इस व्यूह के विनाश के लिए युद्धशास्त्र में बताई गई विधि का ही प्रयोग करूँगा। प्रधान सेनापति के मारे जाने पर ही इसका विनाश हो सकता है; अतः मैं वैसा ही करूँगा।॥33॥
 
I will adopt the method prescribed in the Yudh Shastra for the destruction of this array. It can be destroyed only after the chief commander is killed; therefore, I will do the same.'॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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