श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.46.32 
एवमुक्तोऽर्जुनो राज्ञा प्राञ्जलिर्नृपमब्रवीत्।
यथा भवानाह तथा तत् सर्वं न तदन्यथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर के ऐसा कहने पर अर्जुन ने हाथ जोड़कर उनसे कहा - 'भारत! आप जो कुछ कहते हैं, वह ठीक वैसा ही है। इसमें किंचितमात्र भी अंतर नहीं है॥ 32॥
 
When King Yudhishthira said this, Arjuna folded his hands and said to him - 'Bharat! Whatever you say is exactly like that. There is not even a slight difference in it.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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