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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना, युधिष्ठिरके आदेशसे अर्जुनका आक्रमण, शल्यके द्वारा पाण्डव-सेनाके प्रमुख वीरोंका वर्णन तथा अर्जुनकी प्रशंसा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.46.28 
तस्य पक्षप्रपक्षेभ्यो निष्पतन्ति युयुत्सव:।
पत्त्यश्वरथमातङ्गा: प्रावृषीव बलाहका:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
दोनों ओर से पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथी योद्धा युद्ध के लिए उत्सुक होकर अपनी-अपनी ओर से उसी प्रकार निकल रहे थे, जैसे वर्षा ऋतु में बादल निकल आते हैं।
 
On both sides, warriors on foot, horse, charioteers and elephants, eager for battle, emerged from their sides just as clouds emerge during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)