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mahabharat 8.42.48: मिथ्या भाषण से प्रजा का नाश होता है, अतः झूठ बोलने से मुझे पाप लगेगा; अतः धर्म की रक्षा के लिए मैं झूठ नहीं बोल सकता॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.42.48 
अनृतोक्तं प्रजां हन्यात् तत: पापमवाप्नुयाम्।
तस्माद् धर्माभिरक्षार्थं नानृतं वक्तुमुत्सहे॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मिथ्या भाषण से प्रजा का नाश होता है, अतः झूठ बोलने से मुझे पाप लगेगा; अतः धर्म की रक्षा के लिए मैं झूठ नहीं बोल सकता॥ 48॥
 
False speech destroys the people, so by speaking a lie I will incur sin; therefore, for the purpose of protecting Dharma I cannot speak a lie.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)