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mahabharat 8.42.45: मैं उसे देने के लिए चौदह हजार काली गायें और श्वेत बछड़े लाए, फिर भी मैं उस महान ब्राह्मण से कोई अनुग्रह प्राप्त नहीं कर सका।   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.42.45 
कृष्णानां श्वेतवत्सानां सहस्राणि चतुर्दश।
आहरं न लभे तस्मात् प्रसादं द्विजसत्तमात्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मैं उसे देने के लिए चौदह हजार काली गायें और श्वेत बछड़े लाए, फिर भी मैं उस महान ब्राह्मण से कोई अनुग्रह प्राप्त नहीं कर सका।
 
I brought fourteen thousand black cows with white calves to give to him but still I was not able to obtain any favour from that great Brahmin. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)