Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.42.32-33h: षड्, शस, शो, श्री, श्वास या षड् तथा नाना प्रकार के उपसर्गों से युक्त 'सुद्*' शब्द भी 'शत्रु' शब्द बनाने के लिए प्रयुक्त होता है। मेरे प्रति इन समस्त धातुओं का सम्पूर्ण अर्थ आपमें समाया हुआ है। 32 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
षड्, शस, शो, श्री, श्वास या षड् तथा नाना प्रकार के उपसर्गों से युक्त 'सुद्*' शब्द भी 'शत्रु' शब्द बनाने के लिए प्रयुक्त होता है। मेरे प्रति इन समस्त धातुओं का सम्पूर्ण अर्थ आपमें समाया हुआ है। 32 1/2॥
Shad, Shas, Sho, Shree, Shwas or Shad and the word 'Sud*' with different types of prefixes is also used to form the word 'Shatru'. The entire meaning of all these metals towards me is integrated in you. 32 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥