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mahabharat 8.42.18-19h: मैं हजारों किरणों से चमकते हुए, सम्पूर्ण दिशाओं को गर्मी प्रदान करने वाले, महाबली सूर्य के समान अपने बाणों से महाबली अर्जुन को उसी प्रकार ढक लूँगा, जैसे मेघ अंधकार का नाश करने वाले सूर्यदेव को ढक लेता है।   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  8.42.18-19h 
सहस्ररश्मिप्रतिमं ज्वलन्तं
दिशश्च सर्वा: प्रतपन्तमुग्रम्॥ १८॥
तमोनुदं मेघ इवातिमात्रं
धनंजयं छादयिष्यामि बाणै:।
 
 
अनुवाद
मैं हजारों किरणों से चमकते हुए, सम्पूर्ण दिशाओं को गर्मी प्रदान करने वाले, महाबली सूर्य के समान अपने बाणों से महाबली अर्जुन को उसी प्रकार ढक लूँगा, जैसे मेघ अंधकार का नाश करने वाले सूर्यदेव को ढक लेता है।
 
Shining like the Sun with thousands of rays, giving heat to all directions, I will completely cover the fearsome warrior Arjun with my arrows, just as a cloud covers the Sun God, who destroys darkness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)