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mahabharat 8.42.11: हे प्रभु! आज मैं युद्ध में भयंकर धनुष धारण करने वाले, वेगवान, भयंकर, असह्य वीर और सत्य की शपथ लेने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन को मार डालूँगा॥11॥   |   mahabharat अध्याय 8.42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 42: कर्णका श्रीकृष्ण और अर्जुनके प्रभावको स्वीकार करते हुए अभिमानपूर्वक शल्यको फटकारना और उनसे अपनेको परशुरामजीद्वारा और ब्राह्मणद्वारा प्राप्त हुए शापोंकी कथा सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.42.11 
शल्योग्रधन्वानमहं वरिष्ठं
तरस्विनं भीममसह्यवीर्यम्।
सत्यप्रतिज्ञं युधि पाण्डवेयं
धनंजयं मृत्युमुखं नयिष्ये॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आज मैं युद्ध में भयंकर धनुष धारण करने वाले, वेगवान, भयंकर, असह्य वीर और सत्य की शपथ लेने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन को मार डालूँगा॥11॥
 
Surge! Today I will send to death the son of Pandu, Arjuna, the best wielder of the fierce bow in battle, the swift, the fierce, the unbearably brave and the one who has sworn to the truth. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)