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श्लोक  8.4.10 
ततो ध्यात्वा चिरं कालं नि:श्वस्य च पुन: पुन:।
स्वान् पुत्रान् गर्हयामास बहु मेने च पाण्डवान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, बहुत देर तक विचार करने के पश्चात्, वे बार-बार गहरी साँस लेते हुए अपने पुत्रों की निन्दा और पाण्डवों की प्रशंसा करने लगे।
 
Thereafter, after thinking for a long time, he started criticising his sons and praising the Pandavas while taking deep breaths again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)