श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.39.31 
यावद् गाण्डीवघोषं त्वं न शृणोषि महाहवे।
तावदेव त्वया कर्ण शक्यं वक्तुं यथेच्छसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! जब तक तुम महायुद्ध में गाण्डीव की गर्जना नहीं सुनते, तब तक तुम जो चाहो कह सकते हो॥31॥
 
Karna! As long as you do not hear the roar of Gandiva in the great war, you may say whatever you like.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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