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mahabharat 8.39.30: जब तक तुम श्री कृष्ण और अर्जुन को रथ पर बैठे हुए नहीं देखते, जो सूर्य और चंद्रमा के समान सुन्दर दिखते हैं, तब तक तुम स्वयं को बाघ ही समझते हो।   |   mahabharat अध्याय 8.39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.39.30 
व्याघ्रं त्वं मन्यसेऽऽत्मानं यावत् कृष्णौ न पश्यसि।
समास्थितावेकरथे सूर्याचन्द्रमसाविव॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब तक तुम श्री कृष्ण और अर्जुन को रथ पर बैठे हुए नहीं देखते, जो सूर्य और चंद्रमा के समान सुन्दर दिखते हैं, तब तक तुम स्वयं को बाघ ही समझते हो।
 
Until you see Sri Krishna and Arjuna seated on a chariot, looking as beautiful as the Sun and the Moon, you consider yourself to be a tiger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)