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mahabharat 8.39.27: कर्ण! जैसे घर में बैठा हुआ कुत्ता वन में रहने वाले व्याघ्र पर भौंकता है, वैसे ही तुम भी व्याघ्र रूपी अर्जुन पर भौंक रहे हो॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 8.39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.39.27 
यथा च स्वगृहस्थ: श्वा व्याघ्रं वनगतं भषेत्।
तथा त्वं भषसे कर्ण नरव्याघ्रं धनंजयम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! जैसे घर में बैठा हुआ कुत्ता वन में रहने वाले व्याघ्र पर भौंकता है, वैसे ही तुम भी व्याघ्र रूपी अर्जुन पर भौंक रहे हो॥ 27॥
 
Karna! Just like a dog sitting in his house barks at a tiger living in the forest, you too are barking at the man-tiger Arjuna.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)