| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना » श्लोक 26 |
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| | | | श्लोक 8.39.26  | महामेघं महाघोरं दर्दुर: प्रतिनर्दसि।
बाणतोयप्रदं लोके नरपर्जन्यमर्जुनम्॥ २६॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे भयंकर बादल के सामने मेंढक टर्राता है, वैसे ही तुम मनुष्यों के बादल अर्जुन पर गर्जना करते हो, जो संसार में बाणों के रूप में जल बरसाते हो॥ 26॥ | | | | Just as a frog croaks in the face of a fearsome cloud, similarly you roar at Arjuna, the cloud of humans, who showers water in the form of arrows in the world.॥ 26॥ | | ✨ ai-generated | | |
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