श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.39.14 
यदा वै त्वां फाल्गुनवेगयुक्ता
ज्याचोदिता हस्तवता विसृष्टा:।
अन्वेतार: कङ्कपत्रा: सिताग्रा-
स्तदा तप्स्यस्यर्जुनस्यानुयोगात्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! जब अर्जुन के सुशिक्षित हाथों से छोड़े हुए और धनुष की प्रत्यंचा से प्रेरित होकर कंकपत्रों से विभूषित वे तीखे बाण अर्जुन के बल से तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर जाएँगे, तब तुम्हें अर्जुन से प्रश्न पूछने का पश्चाताप होगा॥ 14॥
 
Karna! When those sharp arrows adorned with Kanka leaves, fired by Arjuna's well-trained hands and inspired by his bowstring, end up entering your body with the force of Arjuna, then you will repent for asking Arjuna questions.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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