श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 39: शल्यका कर्णके प्रति अत्यन्त आक्षेपपूर्ण वचन कहना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.39.11 
कर्ण उवाच
स्वबाहुवीर्यमाश्रित्य प्रार्थयाम्यर्जुनं रणे।
त्वं तु मित्रमुख: शत्रुर्मां भीषयितुमिच्छसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा - शल्य! मैं अपने भुजबल के बल पर अर्जुन को युद्धभूमि में परास्त करना चाहता हूँ, किन्तु तुम तो वास्तव में शत्रु हो जो मेरे मित्र होने का ढोंग रचकर मुझे यहाँ डराने का प्रयत्न कर रहे हो।
 
Karna said - Shalya! I want to defeat Arjuna on the battlefield by relying on my physical strength, but you are actually an enemy who is pretending to be my friend and is trying to scare me here.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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