श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 38: कर्णके द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुनका पता बतानेवालेको नाना प्रकारकी भोगसामग्री और इच्छानुसार धन देनेकी घोषणा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.38.1 
संजय उवाच
प्रयाणे च तत: कर्णो हर्षयन् वाहिनीं तव।
एकैकं समरे दृष्ट्वा पाण्डवान् पर्यपृच्छत॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! प्रस्थान के समय आपकी सेना का हर्ष बढ़ाने वाला कर्ण युद्धस्थल में पाण्डव सैनिकों को देखकर उनमें से प्रत्येक से पूछने और कहने लगा -॥1॥
 
Sanjaya says - O King! At the time of departure, Karna, increasing the joy of your army, seeing the Pandava soldiers in the battlefield, began to ask and say to each one of them -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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