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mahabharat 8.35.43: परंतु मैं कर्ण के हित के लिए जो भी प्रिय या अप्रिय वचन कहूँ, उसे आप और कर्ण पूर्णतया क्षमा कर दें ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.35.43 
यत्तु कर्णमहं ब्रूयां हितकाम: प्रियाप्रिये।
मम तत् क्षमतां सर्वं भवान् कर्णश्च सर्वश:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
परंतु मैं कर्ण के हित के लिए जो भी प्रिय या अप्रिय वचन कहूँ, उसे आप और कर्ण पूर्णतया क्षमा कर दें ॥ 43॥
 
But whatever pleasant or unpleasant words I may say to Karna for his welfare, you and Karna should forgive them completely. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)