श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.33.63 
तत: प्रसन्नो भगवान् स्वागतेनाभिनन्द्य च।
प्रोवाच व्येतु वस्त्रासो ब्रूत किं करवाणि व:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान शंकर प्रसन्न हुए और देवताओं का स्वागत-सत्कार करके उन्हें प्रसन्न किया और कहा - 'देवताओं! आपका भय दूर हो जाए; बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ?'
 
Then Lord Shankar became happy and pleased the gods by welcoming them and said - 'O gods! Your fear should go away; Tell me, what should I do for you?'
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि त्रिपुराख्याने त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें त्रिपुराख्यानविषयक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६७ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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