श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  8.33.60 
कुमारपित्रे त्र्यक्षाय प्रवरायुधधारिणे।
प्रपन्नार्तिविनाशाय ब्रह्मद्विट्संघघातिने॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
आप कुमार कार्तिकेय के पिता हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, उत्तम आयुध धारण करने वाले हैं, शरणागतों के दुःखों का नाश करने वाले हैं और ब्रह्मद्वेषियों के समूह का नाश करने वाले हैं। आपको नमस्कार है॥ 60॥
 
‘You are the father of Kumar Kartikeya, the one with three eyes, the one carrying the best weapons, the destroyer of the sorrows of those who surrender and the destroyer of the group of traitors of Brahman. Salutations to you.॥ 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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