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mahabharat 8.33.53-54h: तब भगवान शंकर ने कहा, "आपका कल्याण हो" और आदरपूर्वक उसे उठाकर मुस्कराकर कहा, "बोलो, बोलो; क्या बात है?"   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  8.33.53-54h 
तान् स्वस्तिवादेनाभ्यर्च्य समुत्थाप्य च शङ्कर:॥ ५३॥
ब्रूत ब्रूतेति भगवान् स्मयमानोऽभ्यभाषत।
 
 
अनुवाद
तब भगवान शंकर ने कहा, "आपका कल्याण हो" और आदरपूर्वक उसे उठाकर मुस्कराकर कहा, "बोलो, बोलो; क्या बात है?"
 
Then Lord Shankar said, "May you be blessed," and raised him up with respect and said with a smile, "Speak, speak; what is it?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)