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mahabharat 8.33.46: उनके वचन सुनकर इन्द्र सहित सभी देवता ब्रह्माजी को साथ लेकर महादेवजी की शरण में गए।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.33.46 
इति तस्य वच: श्रुत्वा देवा: शक्रपुरोगमा:।
ब्रह्माणमग्रत: कृत्वा वृषाङ्कं शरणं ययु:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उनके वचन सुनकर इन्द्र सहित सभी देवता ब्रह्माजी को साथ लेकर महादेवजी की शरण में गए।
 
On hearing his words, all the gods including Indra went to the shelter of Mahadevji with Brahmaji in the lead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)