श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.33.41 
श्रुत्वा तद् भगवान् देवो देवानिदमुवाच ह।
ममापि सोऽपराध्नोति यो युष्माकमसौम्यकृत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह सब सुनकर ब्रह्माजी ने देवताओं से इस प्रकार कहा - 'देवताओं! जो तुम्हारा अनिष्ट करता है, वह मेरा भी अपराधी है ॥ 41॥
 
After listening to all this, Lord Brahma said to the Gods in this manner - 'O Gods! Whoever does evil to you is guilty against me also. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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