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mahabharat 8.33.34: वरदान के कारण उसका अभिमान बढ़ गया था। वह देवताओं और उनके अनुयायियों को भगाकर अपनी इच्छानुसार विभिन्न स्थानों पर घूमता रहता था।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.33.34 
विद्राव्य सगणान् देवांस्तत्र तत्र तदा तदा।
विचेरु: स्वेन कामेन वरदानेन दर्पिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वरदान के कारण उसका अभिमान बढ़ गया था। वह देवताओं और उनके अनुयायियों को भगाकर अपनी इच्छानुसार विभिन्न स्थानों पर घूमता रहता था।
 
Due to the boon, his pride had increased. He used to roam around as per his wish in various places after chasing away the Gods and their followers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)